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*बारिश में भीगी धान सड़ी, कई बोरियों में अंकुरण; वीडियो वायरल होने के बाद युवक ने धमकी देने का लगाया आरोप*
कटनी। मझगवां स्थित ओपन वेयरहाउस में उपार्जन केंद्रों से खरीदी गई धान के बारिश में खराब होने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बारिश के दौरान पानी गिरने से बड़ी मात्रा में रखी धान खराब हो गई, जबकि कुछ बोरियों में धान के अंकुरित होने की बात भी सामने आई है। मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद वेयरहाउस प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि उपार्जन केंद्रों से किसानों से खरीदी गई धान को मझगवां ओपन वेयरहाउस में सुरक्षा व्यवस्था के तहत रखा गया था। बारिश के बाद यहां रखी धान की स्थिति खराब होने के वीडियो सामने आए। एक युवक द्वारा बनाए गए वीडियो में कथित तौर पर खराब और अंकुरित धान दिखाई गई, जिसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।
*युवक ने लगाया धमकी देने का आरोप*
वीडियो वायरल होने के बाद युवक प्रिंस गौतम ने आरोप लगाया कि वेयरहाउस मैनेजर और कर्मचारियों की ओर से उसे जान से मारने तथा शिकायत वापस लेने की धमकी दी गई। इसके बाद युवक ने सोशल मीडिया पर अपना वीडियो जारी कर पूरे मामले की जानकारी दी और अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
युवक द्वारा एनकेजे थाना में लिखित शिकायत देकर अपनी जान की सुरक्षा की मांग किए जाने की भी बात सामने आई है। हालांकि, धमकी के आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
*मीडिया कवरेज के दौरान शुरू हुआ धान हटाने का काम*
मामला सामने आने के बाद जब मीडिया टीम मझगवां ओपन वेयरहाउस पहुंची और मौके की स्थिति को कैमरे में कैद करने का प्रयास किया, तो आरोप है कि वेयरहाउस मैनेजर मौके से चले गए। वहीं, इसके बाद खराब धान और तिरपाल को हटाने अथवा ठिकाने लगाने का काम शुरू होने की बात सामने आई है।
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में रखी गई किसानों की खरीदी गई धान बारिश में खराब कैसे हुई? क्या धान को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए थे? खराब हुई धान की जिम्मेदारी किसकी तय होगी और शासन को इससे कितनी आर्थिक क्षति हुई—इन सवालों की जांच जरूरी है।
*जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति*
मझगवां वेयरहाउस में रखी धान की स्थिति, भंडारण व्यवस्था, बारिश से हुए नुकसान और युवक द्वारा लगाए गए धमकी के आरोपों की निष्पक्ष जांच होने पर ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी। प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग है कि मौके का निरीक्षण कर धान के नुकसान का आकलन कराया जाए तथा भंडारण में लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाए।

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