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सुनीत कुमार पाण्डेय ने पैर फैक्चर होने के बाद भी जनगणना का कार्य किया शत प्रतिशत कलेक्टर ने किया सम्मान

दुर्घटना में पैर टूटा … मगर नहीं टूटा हौसला”

कलेक्टर श्री तिवारी ने कर्तव्यपरायण प्रगणक को सराहा, शाल-श्रीफल से किया सम्मानित

कटनी - कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने दुर्घटना में



पैर फ्रैक्चर होने के बाद भी शत-प्रतिशत मकान सूचीकरण और मकान गणना का कार्य पूरा करने वाले देवरी हटाई के प्रगणक श्री सुनीत कुमार पाण्डेय के कर्तव्यपरायणता की सराहना करते हुए शुक्रवार को शाल-श्रीफल प्रदान कर और फूल माला पहनाकर सम्मानित किया।

  कलेक्टर श्री तिवारी ने प्रगणक की कर्तव्यनिष्ठा व इच्छा शक्ति की सराहना करते हुए सभी प्रगणकों से समय-सीमा में जनगणना कार्य संपादित करने की बात कही है। चार्ज अधिकारी और तहसीलदार श्री अतुलेश सिंह मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रगणक से कहते रहे कि पैर फ्रैक्चर की वजह से आपकी ड्यूटी जनगणना से काट देते हैं, इसके बाद श्री पांडेय ने बड़ी विनम्रता से कहा—“ड्यूटी मत काटिए, मैं अपना काम पूरा करूंगा।”

प्लास्टर चढ़ा पैर, हाथ में रजिस्टर और मन में अडिग संकल्प—यही उनकी पहचान बन गई।उनके संकल्प की वजह से मकान सूचीकरण और मकान गणना का सौ-फीसदी काम समय से पहले पूरा हो गया।

           ऐसे में जब कई लोग इस भीषण गर्मी में गांव- गांव,घर -घर जाकर जनगणना की ड्यूटी से नाम कटवाने का जतन करते हैं, तब इस स्थिति में एचएलबी 105 देवरी हटाई के प्रगणक श्री पांडेय का कार्य के प्रति जोश और जज्बा स्तुत्य है।देवरी हटाई की गलियों में बीते कुछ दिनों से सिर्फ जनगणना का काम ही नहीं चल रहा था, बल्कि एक ऐसे जज़्बे की कहानी भी लिखी जा रही थी, जो हर किसी के लिए प्रेरणा बन गई।

 एक दिन अचानक जनगणना के लिए मकानों की नंबरिंग का काम करते हुए ही दुर्घटना में श्री पांडेय का पैर फ्रैक्चर हो गया। डॉक्टरों ने आराम करने की सलाह दी, परिवार ने चिंता जताईऔर हालात ने जैसे उनके कदमों को थामने की कोशिश की। लेकिन जो व्यक्ति अपने कर्तव्य को ही अपना धर्म मानता हो, उसे भला ये बाधाएं कैसे रोक सकती थीं?

          प्लास्टर चढ़ा पैर, हाथ में रजिस्टर, और चेहरे पर वही दृढ़ संकल्प—सुनीत पाण्डेय रोज़ निकल पड़ते थे घर-घर की ओर।प्रगणक श्री पांडेय चले जरूर सहारे के साथ…लेकिन उनका संकल्प अपने पैरों पर अडिग रहा।

          दर्द हर कदम पर दस्तक देता, लेकिन उनके इरादे उससे कहीं ज्यादा मजबूत थे। कभी बैसाखी का सहारा, तो कभी साथियों का कंधा… लेकिन काम के प्रति उनकी लगन में कहीं कोई कमी नहीं आई।

          गांव के लोग जब उन्हें इस हालत में भी अपने दरवाजे पर खड़ा देखते, तो सिर्फ आंकड़े ही नहीं देते—बल्कि सम्मान से उनका हौसला भी बढ़ाते। हर घर के साथ जुड़ती गई एक नई कहानी ,हर दिन उनके जज्बे को और मजबूत करता गया।

आखिरकार, उन्होंने वह कर दिखाया जो कई लोगों के लिए असंभव लगता—मकान सूचीकरण और मकान गणना का शत-प्रतिशत कार्य पूर्ण किया।यह सिर्फ एक लक्ष्य की प्राप्ति नहीं थी, बल्कि यह साबित करने का संदेश था 

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